मैं वो हूँ जो मंजरी को सताने वाले को माफ नहीं कर सकता मैं वो हूँ जो मंजरी को सताने वाले को माफ नहीं कर सकता
उसे खिड़की पर फिर कुछ परछाईं सी दिखी वो तेज़ी से उठी और उसने खिड़की खोल दी . ........... उसे खिड़की पर फिर कुछ परछाईं सी दिखी वो तेज़ी से उठी और उसने खिड़की खोल दी . .....
उनके हटते ही देवांश और मंजरी ने एकदूसरे को गले लगा लिया..... उनके हटते ही देवांश और मंजरी ने एकदूसरे को गले लगा लिया.....